Desi Discoveries के सफरनामा में आज बात होगी उस दिन की, जब रेत के टीलों के बीच उत्सव का शंखनाद हुआ। 29 जनवरी की वो सुबह और पोकरण की वो रौनक... सच कहूँ तो शब्दों में बयां करना मुश्किल है, पर चलिए कोशिश करते हैं।
भोर की पहली किरण और महादेव का आशीर्वाद
हमारी सुबह बहुत जल्दी शुरू हुई। सबसे पहले हम पहुंचे "नेपालेश्वर महादेव" मंदिर। सुबह की आरती की उस शांति और सकारात्मकता ने पूरे दिन के लिए ऊर्जा भर दी। आरती के बाद इंतज़ार था उस शोभायात्रा का, जो मंदिर से कार्यक्रम स्थल तक जाने वाली थी।
शोभायात्रा: मनोरंजन और संस्कृति का संगम
जैसे ही शोभायात्रा शुरू हुई, माहौल एकदम बदल गया! एक तरफ 'गोरिल्ला' और 'मिक्की माउस' बने कलाकार बच्चों और बड़ों का मनोरंजन कर रहे थे (सेल्फी का दौर जोरों पर था!), तो दूसरी तरफ राजस्थान की असली विरासत अपनी छटा बिखेर रही थी।

लोकनृत्य की धूम: बाहर से आए कलाकार अपने पारंपरिक नृत्य से राजस्थानी संस्कृति को जीवंत कर रहे थे।

DJ और डांस: स्थानीय महिलाओं और लड़कियों ने भी पीछे रहने की कसर नहीं छोड़ी और DJ की धुनों पर जमकर डांस का आनंद लिया।
ऊंटों का काफिला: सबसे आगे सजे-धजे ऊंटों पर सवार लोग और उनके साथ चलता कलाकारों का कारवां—जिसमें मोरपंख कलाकार, घूमर करती महिलाएं और गैर नृत्य की थाप... ये सब देख कर गर्व महसूस हो रहा था।
कार्यक्रम स्थल (गवर्नमेंट स्कूल): खेल और प्रतियोगिताएं
शोभायात्रा जब मुख्य कार्यक्रम स्थल (सरकारी स्कूल) पहुंची, तो वहां अलग ही उत्साह था। वहां कई दिलचस्प प्रतियोगिताएं हुईं:

मिस्टर और मिस पोकरण का चयन।

मटका रेस (Pot Race) और रस्साकशी जिसमें स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने खूब जोर आजमाया।

वक्त का पता ही नहीं चला कि कब दोपहर ढल गई और शाम होने को आई।
सफर का स्वाद: भुजिया-प्याज और जैसलमेर की ओर
दोपहर बाद हम पोकरण से जैसलमेर के लिए रवाना हो गए। रास्ते में रुककर जो "भुजिया-प्याज" का नाश्ता किया, उसने तो सफर का मजा दोगुना कर दिया! राजस्थान का असली स्वाद सड़कों किनारे ही मिलता है।
आगे क्या? पोकरण की यादें समेटे अब हम जैसलमेर की गलियों में हैं। कल 30 जनवरी को क्या हुआ? डेजर्ट फेस्टिवल के पहले दिन जैसलमेर में कैसी धूम रही? ये किस्से सुनाऊंगा कल की पोस्ट में।
तब तक के लिए जुड़े रहिए Desi Discoveries के साथ।
राम-राम! 🚩

