डेजर्ट फेस्टिवल 2026 के कार्यक्रमों की गहमागहमी के बाद, आखिरी दिन हमने तय किया कि हम इस 'गोल्डन सिटी' की आत्मा को करीब से महसूस करेंगे। जैसलमेर सिर्फ उत्सवों का शहर नहीं है, यह जीवित इतिहास है।

सोनार किला: एक 'लिविंग फोर्ट' का अनुभव
हमारी शुरुआत हुई जैसलमेर किले से। इसे 'सोनार किला' भी कहा जाता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दुनिया का ऐसा अनोखा किला है जहाँ आज भी आबादी बसती है। किले के अंदर चलते हुए आपको अहसास ही नहीं होता कि आप किसी स्मारक में हैं; यहाँ घर हैं, मुस्कुराते लोग हैं, पुराने मंदिर हैं और जीवंत दुकानें हैं। संकरी गलियों में घूमना ऐसा लगा जैसे हम समय के पीछे (Time Travel) चले गए हों।


हवेलियों का वैभव: पटवों की हवेली और सालिम सिंह की हवेली
जैसलमेर की वास्तुकला को देखने हम हवेलियों की ओर बढ़े:
पटवों की हवेली: पत्थर पर की गई ऐसी बारीक नक्काशी कि यकीन करना मुश्किल हो जाए। हालांकि, सैलानियों की जबरदस्त भीड़ की वजह से हम अंदर तो नहीं जा सके, लेकिन इसकी बाहरी बनावट (Exterior) को निहारना और तस्वीरें लेना भी किसी ट्रीट से कम नहीं था।


सालिम सिंह की हवेली: इसे 'मोती महल' के नाम से भी जाना जाता है। इसकी जहाज जैसी आकृति और मोर के पंख जैसी बालकनियाँ जैसलमेर के शिल्पकारों की कला का लोहा मनवाती हैं।


जैसलमेर का स्वाद: जो दिल जीत ले
बिना स्वाद के कोई भी सफर अधूरा है। जैसलमेर की गलियों में घूमते हुए हमने यहाँ के चटपटे और मीठे जायकों का आनंद लिया:
यहाँ के मिर्ची बड़े का तीखापन और मक्खनिया लस्सी की मिठास का कॉम्बिनेशन लाजवाब है।


और हाँ, जैसलमेर के मशहूर घोटुआ लड्डू! इनका स्वाद ऐसा है जो लंबे समय तक हमारी जुबान पर रहेगा।

अलविदा जैसलमेर!
जैसलमेर सच में बहुत प्यारा शहर है। यहाँ की पीली ईंटें जब सूरज की रोशनी में चमकती हैं, तो समझ आता है कि इसे 'स्वर्ण नगरी' क्यों कहते हैं। यहाँ के लोग, यहाँ का खाना और यह जादुई माहौल हमेशा याद आएगा।
अब समय है एक नई दिशा में मुड़ने का और एक नए सफर की शुरुआत करने का। जैसलमेर की यादें हमारे बैग में कैद हैं और दिल में नया उत्साह।





अगले सफर के लिए तैयार रहें! राजस्थान की इस सुनहरी रेत को पीछे छोड़ हम बढ़ रहे हैं अपनी अगली मंजिल की ओर। इसी तरह के शानदार ट्रेवल ब्लॉग्स और देसी अनुभवों के लिए Desi Discoveries से जुड़े रहें।