नमस्ते साथियों! Desi Discoveries की पहली यात्रा में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे बीकानेर के उस उत्सव की जिसकी गूँज सात समंदर पार तक सुनाई देती है— अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 2026

9 जनवरी की सुबह, बीकानेर एक अलग ही रंग में रंगा नजर आया। उत्सव के पहले दिन की शुरुआत हुई 'हेरिटेज वॉक' (Heritage Walk) के साथ, जिसने बीकानेर की पुरानी संस्कृति को आँखों के सामने जीवंत कर दिया।

लक्ष्मीनाथ जी मंदिर से रामपुरिया हवेली तक का सफर

यात्रा की शुरुआत शहर के प्राचीन लक्ष्मीनाथ जी मंदिर से हुई। यहाँ से निकली शोभायात्रा केवल एक जुलूस नहीं, बल्कि राजस्थानी कला का चलता-फिरता म्यूजियम थी। जैसे-जैसे यह शोभायात्रा बड़ा बाजार और मोहता चौक से गुजरी, बीकानेर की तंग गलियों में जोश बढ़ता गया।

कला और कलाकारों का अद्भुत संगम

इस हेरिटेज वॉक में राजस्थान के अलग-अलग कोनों से आए कलाकारों ने समां बांध दिया:

  • क्रूर सिंह की वापसी: मशहूर धारावाहिक "चंद्रकांता" के किरदार 'क्रूर सिंह' का रूप धरे बहरूपिया कलाकार ने सबको हैरान कर दिया। उन्हें देखकर ऐसा लगा मानो वह किरदार पर्दे से निकलकर गलियों में आ गया हो।

  • लोक नृत्यों की छटा: हाड़ौती के प्रसिद्ध कलाकार शिव नारायण जी और उनकी टीम ने जब 'चकरी नृत्य' शुरू किया, तो हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। इसके साथ ही 'गैर नृत्य' और 'कच्ची घोड़ी' के कलाकारों ने अपनी ऊर्जा से सबका मन मोह लिया।

बीकानेर के 'वर्ल्ड रिकॉर्ड' चेहरे

शोभायात्रा की असली जान थे बीकानेर के वो लोग जो अपनी विशिष्ट पहचान के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं:


  1. गिरधर जी व्यास: इन्हें कौन नहीं जानता? 40 फीट लंबी मूंछों वाले गिरधर जी इस यात्रा के केंद्र में थे।

  2. रमेश जी व्यास: इन्होंने दुनिया की सबसे भारी और बड़ी पगड़ी (करीब 35-40 किलो) पहनकर सबको अपनी शक्ति और संस्कृति के प्रति समर्पण से रूबरू कराया।


राजस्थानी वेशभूषा में सजे बीकानेर के रोबीले और पारंपरिक लिबास में महिलाएं इस उत्सव की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे।

स्वाद का तड़का: घेवर और कचोरी

बीकानेर आए और यहाँ का जायका न चखा, ऐसा कैसे हो सकता है? हेरिटेज वॉक के दौरान पूरे बाजार में स्थानीय पकवानों की महक थी।

  • बृजा महाराज के घेवर: इनका स्वाद जिसने भी चखा, वह बस तारीफ ही करता रह गया।

  • जूनिया महाराज की कचोरी: बाहर से आए सैलानियों के लिए यह किसी ट्रीट से कम नहीं थी।

भंवर निवास और रामपुरिया हवेली का वैभव

यात्रा का पड़ाव ऐतिहासिक रामपुरिया हवेली पर जाकर खत्म हुआ। इसी बीच मुझे 'भंवर निवास होटल' को अंदर से देखने का मौका मिला। कमरों की नक्काशी, एंटीक मूर्तियाँ और दीवारों पर की गई कारीगरी देख कर समझ आता है कि बीकानेर की कला कितनी समृद्ध है।


अंत में, रामपुरिया हवेली के सामने सैलानियों ने ढेरों तस्वीरें खिंचवाईं। बीकानेर का गौरव कही जाने वाली ये हवेलियाँ आज भी अपनी भव्यता को समेटे खड़ी हैं।

Desi Discoveries Note: बीकानेर टूरिज्म डिपार्टमेंट का यह आयोजन वाकई काबिले तारीफ था। विरासत को सहेजने और उसे दुनिया को दिखाने का इससे बेहतर तरीका नहीं हो सकता।