बीकानेर की होली केवल रंगों का त्यौहार नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति, 'रम्मत' (लोक नाट्य) और 'डोलची मार' जैसी अनोखी परंपराओं का मेल है। यहाँ 23 फरवरी से 3 मार्च तक होने वाले मुख्य कार्यक्रमों का विवरण दिया गया है:
फरवरी के मुख्य आकर्षण
तारीख कार्यक्रम का नाम स्थान विवरण 23 फरवरी खेलनी सप्तमी विभिन्न चौक होली के उत्सवों की शुरुआत। 23-24 फरवरी थंभ पूजन विभिन्न चौक होली के प्रतीक स्तंभ का पूजन। 24 फरवरी (रात) भांग सम्मेलन मोहता चौक पारंपरिक भंग का प्रसाद और सांस्कृतिक मिलन। 24 फरवरी फागोत्सव बड़ा गोपाल जी मन्दिर राधा-कृष्ण के फाग के गीतों के साथ फूलों की होली। 24 फरवरी फक्कड़दाता रम्मत नत्थूसर गेट (अन्दर) पुरानी परंपराओं पर आधारित लोक नाट्य 'रम्मत'। 26 फरवरी (दोपहर) श्री श्याम फाग महोत्सव लक्ष्मीनाथ जी मन्दिर खाटू श्याम जी के भजनों और गुलाल की होली। 26 फरवरी (रात) भक्त पूर्णमल रम्मत बिस्सा चौक पारंपरिक रम्मत का आयोजन। 26 फरवरी स्वांग मेहरी रम्मत भट्टड़ों का चौक कलाकारों द्वारा विभिन्न पात्रों का स्वांग (भेष) रचना। 27 फरवरी व्यास जाति गेर विभिन्न मार्ग पारंपरिक लोक वाद्य यंत्रों के साथ सामूहिक नृत्य। 27 फरवरी (रात) जमनादास कल्ला रम्मत व्यासों का चौक बीकानेर की प्रसिद्ध रम्मतों में से एक। 27 फरवरी (रात) दासी महाराज स्वांग मेहरी रम्मत बारहगुवाड़ स्थानीय लोक कला का अद्भुत प्रदर्शन। 28 फरवरी हर्ष-व्यास डोलची खेल हर्षों-व्यासों का चौक बीकानेर की सबसे प्रसिद्ध 'डोलची मार' होली का आयोजन। 28 फरवरी (रात) चंग धमाल जस्सूसर गेट (अन्दर) चंग की थाप पर पारंपरिक होली के गीत (फाग)।
मार्च के मुख्य आकर्षण
| तारीख | कार्यक्रम का नाम | स्थान | विवरण |
| 1 मार्च | होली की बारात | सोनारों की गुवाड़ | व्यंग्यात्मक और हास्य से भरपूर पारंपरिक बारात। |
| 1 मार्च (रात) | हड़़ाउ मेहरी रम्मत | बारहगुवाड़ चौक | रम्मत परंपरा का एक अत्यंत लोकप्रिय भाग। |
| 2 मार्च | ओझा छंगाणी डोलची खेल | बारहगुवाड़ | पानी की डोलची के साथ परंपरागत मुकाबला। |
| 2 मार्च | होलिका दहन | पूरे शहर में | बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दहन उत्सव। |
| 3 मार्च | धुलण्डी व तणी तोड़ | नत्थूसर गेट | होली का मुख्य दिन जब रंगों के साथ 'तणी तोड़' की परंपरा होती है। |
'Desi Discoveries' देखने वालो के लिए कुछ खास टिप्स:
डोलची मार होली: यह बीकानेर की पहचान है। हर्ष और व्यास जातियों के बीच होने वाले इस खेल में पानी की डोलची से पीठ पर प्रहार किया जाता है। इसे 'अद्भुत बीकानेरी कल्चर' के रूप में हाईलाइट करें।
रम्मतें: ये केवल नाटक नहीं, बल्कि सदियों पुरानी मौखिक लोक परंपराएं हैं जो पूरी रात (Night Vigil) चलती हैं।
फोटोग्राफी: बीकानेर के परकोटे (Old City) के चौकों में होने वाले इन कार्यक्रमों की वाइब बहुत ही जीवंत और कलरफुल होती है।
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