नमस्ते साथियों! Desi Discoveries की इस विशेष सीरीज के आखिरी पड़ाव में आज हम बात करेंगे उस दिन की, जिसने पिछले 10 सालों के भीड़ के रिकॉर्ड तोड़ दिए। अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 2026 का तीसरा दिन बीकानेर से कुछ दूर रायसर के रेतीले धोरों के नाम रहा।
रस्साकशी और कबड्डी: देसी बनाम विदेशी
सुबह 10 बजे से ही धोरों पर हलचल शुरू हो गई थी। सबसे ज्यादा मजा आया 'Tag of War' (रस्साकशी) में। एक तरफ बीकानेर के स्थानीय लोग और दूसरी तरफ विदेशी सैलानी! रस्सा खींचने की इस जंग में जो उत्साह और हंसी-मजाक देखने को मिला, उसने धोरों की फिजा बदल दी। महिलाओं के वर्ग में भी यह प्रतियोगिता बेहद रोमांचक रही। इसके बाद हुई कबड्डी में विदेशी पर्यटकों का जोश देखने लायक था, जब वे 'कबड्डी-कबड्डी' बोलते हुए रेतीले मैदान में उतरे।


आसमान की सैर: पैरामोटरिंग
रायसर में इस बार सबसे खास था पैरामोटरिंग। महज 2000 रुपये में 4-5 मिनट के लिए आसमान से धोरों का नजारा देखना एक 'वन्स इन अ लाइफटाइम' एक्सपीरियंस था। ऊंचाइयों से जब आप नीचे सुनहरे धोरों और उमड़ती भीड़ को देखते हैं, तो वो दृश्य रोंगटे खड़े कर देता है।
धोरों की मस्ती और ऊंट की सवारी
रायसर के ऊंचे-ऊंचे धोरों पर लोग फोटोशूट करवाते और राजस्थानी जायकों का आनंद लेते नजर आए। ऊंट चालकों ने अपने सजे-धजे ऊंटों पर सैलानियों को रेगिस्तान की सैर करवाई।

अग्नि नृत्य: नाथ संप्रदाय का चमत्कार
जैसे ही शाम ढली, स्टेज पर संगीत की धुनें गूंजने लगीं। लेकिन सबका इंतजार था उत्सव के सबसे बड़े आकर्षण—'अग्नि नृत्य' का। कतरियासर के नाथ संप्रदाय के कलाकारों ने जब दहकते अंगारों (धूणे) के बीच प्रवेश किया, तो भीड़ शांत हो गई। जलते हुए कोयलों को मुंह में रखना, उन पर नंगे पांव दौड़ना और अंगारों से होली खेलना... यह कला देखकर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। यह सिर्फ नृत्य नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और तपस्या का प्रदर्शन था।