कैमल फार्म के रोमांच के बाद, उत्सव की शाम डॉ. करणी सिंह स्टेडियम के नाम रही। यहाँ बीकानेर की माटी के उन हुनरमंदों को देखने का मौका मिला जो अपनी जान जोखिम में डालकर कला को जीवंत रखते हैं।
वर्षा सैनी: कला और साहस का अद्भुत मेल
शाम की मुख्य आकर्षण रहीं बीकानेर की मशहूर फोक डांसर वर्षा सैनी। उनके प्रदर्शन ने दर्शकों की सांसें थाम दीं। वर्षा ने केवल नृत्य ही नहीं किया, बल्कि राजस्थान की 'साहस प्रधान' कला का प्रदर्शन किया:

नकीली कीलों और कांच पर नृत्य: जब वे तीखी कीलों और कांच के टुकड़ों पर थिरकीं, तो पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
तलवार की धार पर संतुलन: नंगे पैर तलवारों की धार पर खड़े होकर नृत्य करना उनकी कड़ी मेहनत और संतुलन को दर्शाता था।
मटकी नृत्य: सिर पर एक के बाद एक कई मटकियां रखकर संतुलन बनाते हुए डांस करना वाकई अद्भुत था।
"उत्सव की शाम को और भी सुरीला बनाया बीकानेर के 'श्री सखी ग्रुप' ने। जब मंच पर 'म्हारो सुवटियो' गाने की धुन गूंजी, तो पूरा स्टेडियम थिरक उठा। पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजी ग्रुप की महिला कलाकारों ने अपनी सधी हुई प्रस्तुति और तालमेल से सबका मन मोह लिया। यह परफॉरमेंस राजस्थान की लोक कला और महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण थी।"

मेवाड़ का गवरी नृत्य और अन्य प्रस्तुतियां
स्टेडियम में सिर्फ बीकानेर ही नहीं, बल्कि राजस्थान के अन्य अंचलों की खुशबू भी बिखरी। मेवाड़ से आए कलाकारों ने पारंपरिक 'गवरी नृत्य' पेश किया, जो अपनी विशिष्ट वेशभूषा और कहानी कहने के अंदाज के लिए जाना जाता है। इसके अलावा कई अन्य लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से राजस्थान की विविधता को मंच पर उतारा।

सम्मान समारोह
कार्यक्रम के अंत में उन सितारों को सम्मानित किया गया जिन्होंने इस साल की प्रतियोगिताओं को यादगार बनाया। मिस मरवण, मिस्टर बिकाणा और ढोला-मारवण के विजेताओं को उनकी जीत के लिए पुरस्कृत किया गया, जो बीकानेर के युवाओं के लिए एक गौरवपूर्ण पल था।


